आसानी से रिजेक्शन (Rejection) हैंडल करें इन 5 बातों को अपना कर .

हमें अपने जीवन में बहुत सी बातों और घटनाओं का अनुभव करना होता है. इनमे से कुछ  सकारात्मक होती हैं और कुछ नकारात्मक. कहाँ सकारात्मक बातें आपको और अच्छा करने के लिए मोटीवेट करती है वहीँ बुरे और नकारात्मक अनुभव आपको हताश कर देते हैं.

रिजेक्शन (Rejection) या नकारा जाना एक ऐसी ही घटना  है जो आपको आपकी ही काबिलियत शक करने पर मजबूर कर देती  हैं. लेकिन एक मिनट के लिए सोचिये क्या दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति है जिसे कभी रिजेक्शन (Rejection)  का सामना न करना पड़ा हो ? नहीं ऐसा कोई नहीं है. अमिताभ जैसे सफल फिल्म स्टार से लेकर सचिन जैसे सफल स्पोर्ट्स मैन तक सबने इस रिजेक्शन को झेला है. आज जानते है कि कैसे आप इस रिजेक्शन से डील कर  सकते हैं.

रिजेक्शन से सीखें

रिजेक्शन (Rejection) आपको नयी बातें सीखा सकता है. जैसे आप इंटरव्यू के लिए गये लेकिन आपका सिलेक्शन नहीं हो पाया. ऐसे में आप उस इंटरव्यू को रिवाइंड करके अपने दिमाग में सोचें. इंटरव्यू के विषय में नये आर्टिकल पढ़े और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें.

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आपको रिजेक्ट करने वाले बहुत ही कम है.

जब भी आपको किसी से रिजेक्शन (Rejection)  मिले तो अपने आप से ये ही बात कहें. ये रिजेक्शन आपको आपकी प्रोफेशनल लाइफ में मिले या पर्सनल लाइफ में इससे फरक नहीं पड़ता. हम रोज़ इतने लोगों से मिलते है सभी को तो पसंद नहीं आ सकते. अगर आप 25 साल के है और अब तक 25 बार भी रिजेक्ट हो चुकें है तो भी साल में सिर्फ एक रिजेक्शन..क्या आपको सच में इससे परेशान होना चाहिए ?

रिजेक्शन सिर्फ दुसरे व्यक्ति का जजमेंट है.

जब आपको कोई व्यक्ति आपको रिजेक्ट करता है तो ये उसकी सोच हैं. और किसी एक की सोच सभी के लिए सही नहीं हो सकती. जैसे आपको कोई पकवान बहुत पसंद है लेकिन वो ही पकवान आपके दोस्त को पसंद नहीं है, इसमें कमी पकवान  में नहीं है. बस सोच का अंतर है. आप भी किसी की सोच को अपने ऊपर हावी न होने दें.

रिजेक्शन लाइफ का ही हिस्सा है.

जिस दिन आपको रिजेक्शन (Rejection) मिलें उस दिन समझ जाएँ कि आप अपनी लाइफ की सच्चाई का अनुभव कर रहे हैं. आप रिजेक्ट तभी होते है जब कुछ करने की कोशिश करते हैं.

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सिर्फ आप की सोच महत्वपूर्ण है.

कोई और आपके विषय में में क्या सोचता है उससे ज्यादा जरूरी है कि आप अपने विषय में क्या सोचते हैं. बहुत बार आपके रिजेक्शन (Rejection) का कारण आपकी नेगेटिव सोच हो जाती है. इसलिए पहले खुद की सोच को बदलना जरूरी है. अपने विषय में हमेशा पॉजिटिव सोचें क्यूंकि आप आपकी सोच का ही परिणाम हैं.

 


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