Motivational : जिन्दगी का गूढ़ रहस्य है इन दो कहानियों में

कभी कभी किसी व्यक्ति के जीवन के छोटे छोटे अनुभव या घटनाएँ बड़ी बड़ी शिक्षाएं दे जाती है. ऐसे ही दो घटनाएं हम यहाँ दें रहे है. जो आपको बतायेंगी कि छोटे व्यवसाय से जुड़े लोग भी कितनी गहरी बात आसने से समझा देते हैं .

  1. घटना : समोसे वाले ने सिखाया सबक

दिल्ली में एक बड़ी कंपनी के सामने एक समोसे वाले की दूकान थी. उस व्यक्ति के समोसे इतने स्वादिष्ट थे कि सामने वाली बड़ी कंपनी के अधिकतर लोग लंच में उस शॉप पर आकर समोसे खाते थे.

एक दिन उसकी शॉप पर सामने वाली कंपनी में काम करने वाला एक मेनेजर समोसा खाते हुए उस समोसा बनाने वाले से पूछने लगा, “जब तुमने  अपनी दूकान को इतने अच्छे तरीके से मैनेज की हुई है क्या तुम्हे नहीं लगता की तुम अपने टैलेंट को इस दूकान में समोसे बेच कर waste कर रहे हो?”   सोचो अगर तुम भी मेरी तरह किसी बड़ी कंपनी में जॉब कर रहे होते, तो आज शायद तुम भी मेरी तरह मेनेजर बन गये होते.
ये सुनकर समोसे वाला कुछ सेकंड्स के लिए खामोश रहने के बाद उस मेनेजर से बोला, “सर, मुझे लगता है कि मेरे लिए दूकान चलाना आपके जैसी जॉब करने से बेहतर है.” मेनेजर ने पुछा, “कैसे”?

फिर समोसे वाले ने जवाब दिया, “आज से 10 साल पहले में टोकरी में समोसे बचा करता था, ये तब की बात है जेब आपने ये जॉब ज्वाइन की थी. उस समय में महीने के 1000 कमा लिया करता था और आपकी सैलरी 10,000 थी.पिछले 10 सालों में हम दोनों ने ही बहुत प्रोगेस की. आज में यहाँ समोसों की दुकान चलता हूँ और इस एरिया का फेमस समोसे वाला बन चूका हूँ और आप मेनेजर बन चुके है.

आप महीने के 1 लाख अपनी सैलरी से कमाते है और लगभग इतना ही और कभी कभी इससे ज्यादा में कमा लेता हूँ. मगर फिर भी मेरा काम आपको जॉब से बेहतर इसीलिए है क्यूंकि जैसे मैंने अपना काम कम आमदनी से शुरू किया मेरे बच्चों को ऐसा नहीं करना पड़ेगा. उनके पास मेरी दूकान का एक established नाम होगा लेकिन आपके बच्चों को शायद आपकी ही तरह जीरो से अपना करियर शुरू करना पड़ेगा. जब वे मेनेजर बन जायेंगे तब तक मेरी दुकान का और नाम हो जायेगा.”

उस दूकानदार की बात सुनकर मेनेजर ने चुपचाप समोसों के पैसे दिए और चला गया.
Source: Reddit

  1. घटना : टैक्सी ड्राईवर ने सिखाया सबक

एक पहलवान जैसा, हट्टा-कट्टा, लंबा-चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर किसी स्टेशन पर उतरा। उसनेँ एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना है।

टैक्सी वाले नेँ कहा- 200 रुपये लगेँगे। उस पहलवान आदमी नेँ बुद्दिमानी दिखाते हुए कहा- इतने पास के दो सौ रुपये, आप टैक्सी वाले तो लूट रहे हो। मैँ अपना सामान खुद ही उठा कर चला जाऊँगा।

वह व्यक्ति काफी दूर तक सामान लेकर चलता रहा। कुछ देर बाद पुन: उसे वही टैक्सी वाला दिखा, अब उस आदमी ने फिर टैक्सी वाले से पूछा – भैया अब तो मैने आधा से ज्यादा दुरी तय कर ली है तो अब आप कितना रुपये लेँगे?

टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- 400 रुपये।

उस आदमी नेँ फिर कहा- पहले दो सौ रुपये, अब चार सौ रुपये, ऐसा क्योँ।

टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- महोदय, इतनी देर से आप साईँ मंदिर की विपरीत दिशा मेँ दौड़ लगा रहे हैँ जबकि साईँ मँदिर तो दुसरी तरफ है।

उस पहलवान व्यक्ति नेँ कुछ भी नहीँ कहा और चुपचाप टैक्सी मेँ बैठ गया।

इसी तरह जिँदगी के कई मुकाम मेँ हम किसी चीज को बिना गंभीरता से सोचे सीधे काम शुरु कर देते हैँ, और फिर अपनी मेहनत और समय को बर्बाद कर उस काम को आधा ही करके छोड़ देते हैँ। किसी भी काम को हाथ मेँ लेनेँ से पहले पुरी तरह सोच विचार लेवेँ कि क्या जो आप कर रहे हैँ वो आपके लक्ष्य का हिस्सा है कि नहीँ।

हमेशा एक बात याद रखेँ कि दिशा सही होनेँ पर ही मेहनत पूरा रंग लाती है और यदि दिशा ही गलत हो तो आप कितनी भी मेहनत का कोई लाभ नहीं मिल पायेगा। इसीलिए दिशा तय करेँ और आगे बढ़ेँ कामयाबी आपके हाथ जरुर थामेगी।

 


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