कैसे एक घोडा गाड़ी वाले की बेटी रिओ ओलम्पिक तक पहुंची

इस बार 36 साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक में जा रही है और भारत को सुनहरा मैडल दिलाने की  जिम्मेदारी है “ रानी रामपाल “ के कंधो पर | रानी भारतीय महिला हॉकी टीम के सबसे अच्छे खिलाडियों में से एक नाम | इनके खेल का जलवा पिछले साल हॉकी world लीग के सेमी फाइनल के दौरान देखने को मिला , इनके द्वारा इटली के खिलाफ चंद सेकंड्स किया गया goal हॉकी प्रेमी को याद रहेगा | 2010 में मात्र 15 वर्ष की आयु में रानी ने हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया | उस world कप में रानी द्वारा किये गए गोल से ही भारत को इंग्लैंड के खिलाफ जीत मिले और कांस्य पदक भी |

शुरुआती समय की विषम परीस्थियां

भारत में टैलेंट की कमी नहीं है बस मौका मिलना चाहिए , इसी बात को प्रमाणित किया रानी ने | हरियाणा के शाहाबाद इनका जनम हुआ इनके पिता घोडा गाड़ी चालक थे, अब आप अंदाजा लगा सकते है कितना संघर्ष क्या होगा रानी ने | भारत में माता पिता अपने बच्चों की खेल में रूचि को पसंद नहीं करते उसपर लड़कियों के लिए समस्या ज्यादा है लेकिन इस मामले रानी लकी निकली | इनके पिता ने इन्हें सपोर्ट किया, पैसो की कमी के बावजूद | रानी की शुरुआती ट्रेनिंग शाहाबाद अकादमी में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता बलदेव सिंह की देख रेख में हुई | 2009 में 14.5  साल की उम्र में रानी ने पहली बार भारत के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर champions चैलेंज में कजान में हॉकी थामी और इस टूर्नामेंट में सबसे कम उम्र की व सबसे अधिक goal करने वाली खिलाड़ी बनी |

हॉकी में देश के लिए किये गए अच्छे प्रदशर्न से इन्हें रेलवे में जॉब तो मिल गए लेकिन मात्र 12,000 की सैलरी में घर व ट्रेनिंग के खर्चे पूरा करना एक चैलेंज से कम नहीं |

रानी ओलिंपिक में देश का नाम ऊँचा करेंगी और इनके पिता आज भी घोड़ागाड़ी पर माल ढ़ोने का काम करते है | इसी काम से रानी के  परिवार की गुजर बसर होती आयी है | आभावों में पली बढ़ी रानी को इस बात से कोई हिचक नहीं होती कि उनके पिता आज भी घोड़ागाड़ी चलाते है | रानी ने अपने नाम के साथ अपने पिता का नाम जोडकर अपने पिता व उनकी मेहनत को सम्मान दिया है |सभी इन्हें “रानी रामपाल” के नाम से जानते है |

आशा करते है रानी ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन करें और उन सभी के लिए प्रेरणा बने जो आभावों के कारण असहाय हो जाते है | हम सब को गर्व होना चाहिए रानी के माता पिता पर , जिहोने अपने आभावों की चिंता न करते हुए अपनी बेटी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया |


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